29 जनवरी 2025 को इसरो के ऐतिहासिक 100वें सफल मिशन की चर्चा रही। इस दौरान अंतरिक्ष विज्ञान के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ‘स्वच्छ ईंधन’ (Green Propellants) के उपयोग पर जोर दिया गया, ताकि उपग्रह प्रक्षेपण से ओजोन परत और वायुमंडल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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