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छत्तीसगढ़ खादी ग्रामोद्योग की प्रदर्शनी दिल्ली में: राकेश पांडेय के संदेश के साथ विस्तृत ख़बर भारत गौरव 24*7

नई दिल्ली। 14 से 27 नवंबर 2025 तक राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में छत्तीसगढ़ खादी ग्रामोद्योग द्वारा खादी एवं स्वदेशी वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। इस भव्य प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक एवं आधुनिक खादी वस्त्र, बांस से बने घरेलू और सजावटी उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यह प्रदर्शनी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश पांडेय ने इस अवसर पर कहा, “खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि एक विचार और जीवनशैली है। वर्तमान समय में खादी ने परंपरा से आगे बढ़कर वैश्विक फैशन का हिस्सा बनना शुरू कर दिया है। हमारे कारीगरों की मेहनत और कला को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने के लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं। दिल्ली में आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को खादी के आधुनिक और परंपरागत स्वरूप से परिचित कराना तथा खादी को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाना है।”

 


उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से हमें खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र को और सशक्त बनाने का अवसर मिला है। इस प्रदर्शनी में खादी के नए ‘Fusion Trend Khadi Line’ जैसे हैंडवोवन जैकेट, इंडो-वेस्टर्न कुर्ता, डिजाइनर साड़ियाँ, स्टाइलिश श्रग आदि को दर्शाया गया है जो पारंपरिक और आधुनिक फैशन का संगम है। यह न केवल स्थानीय कारीगरों को रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण देता है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व स्तर पर प्रस्तुत करता है।”
प्रदर्शनी में आयोजित ‘Khadi Fashion Walk – 2025’ ने भी इसे और आकर्षक बनाया, जहां मॉडल्स ने आधुनिक खादी परिधानों का प्रदर्शन कर दर्शकों का मंत्रमुग्ध किया। इसके साथ-साथ बांस से बने पर्यावरण-हितैषी उत्पादों ने भी खूब प्रशंसा बटोरी। यह प्रदर्शनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और कारीगरों के जीवन को सहज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
श्री पांडेय ने सभी नागरिकों, निवेशकों, फैशन विशेषज्ञों, और मीडिया को इस प्रदर्शनी में आने और स्वदेशी खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों का समर्थन करने का सादर आग्रह किया ताकि ग्रामीण और हस्तशिल्प उद्योगों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके और देश आत्मनिर्भर बन सके।

इस तरह के आयोजन छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर भारत के सपने की ओर मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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