केंद्र सरकार की रिपोर्ट में पंजाब‑हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत तक कमी का दावा किया गया, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी प्रदूषण के लिए स्थानीय स्रोत—वाहन, निर्माण, कचरा जलाना और औद्योगिक धुआं—अब ज्यादा जिम्मेदार हैं।
Post Views: 17





