डोंगरगांव (राजनांदगांव) | आकाश शर्मा
कबीरपंथ की दो शताब्दियों से अधिक पुरानी आध्यात्मिक विरासत का केंद्र, नादिया स्थित प्राचीन कबीर साहेब मठ इन दिनों भक्ति के विराट सागर में डूबा हुआ है। अवसर है 202वें अखिल भारतीय सद्गुरु कबीर संत सम्मेलन एवं तीन दिवसीय फाल्गुन महोत्सव 2026 का, जहाँ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिरकत कर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और मठ की ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए दो प्रमुख घोषणाएं कीं:
विशाल डोम का निर्माण: श्रद्धालुओं के बैठने और धार्मिक आयोजनों के लिए मठ परिसर में एक आधुनिक डोम बनाया जाएगा।
मिनी स्टेडियम की सौगात: स्थानीय युवाओं और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मिनी स्टेडियम की घोषणा।
बजट का प्रावधान: मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि फाल्गुन महोत्सव के व्यवस्थित आयोजन के लिए राज्य बजट में विशेष राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
1824 से अनवरत जारी है परंपरा
नादिया गांव का यह प्राचीन मठ वर्ष 1824 में दानवीर भक्त मंगतू ठाकुर के सहयोग से स्थापित किया गया था। तब से आज तक, पिछले 202 वर्षों से यहाँ फाल्गुन महोत्सव की गौरवशाली परंपरा निभाई जा रही है। यह मठ न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देशभर के कबीरपंथियों के लिए समरसता और समानता का संदेश फैलाने वाला एक प्रमुख केंद्र है।
दिग्गजों की मौजूदगी
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री के साथ प्रभारी मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद संतोष पांडेय, और महापौर मधुसूदन यादव समेत कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। संतों के सान्निध्य में पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। मुख्यमंत्री ने संतों का आशीर्वाद लिया और कबीर साहेब के विचारों को समाज का सच्चा मार्गदर्शक बताया।
“कबीर साहेब के उपदेश आज भी समाज को एकजुट करने और कुरीतियों को मिटाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। नादिया मठ की यह 202 साल पुरानी परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है।” > — विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़
मुख्य बिंदु (Highlights):
स्थान: नादिया, डोंगरगांव (राजनांदगांव)।
अवसर: 202वाँ फाल्गुन महोत्सव (वर्ष 1824 से प्रारंभ)।
घोषणा: विशाल डोम और मिनी स्टेडियम का निर्माण।
उद्देश्य: धार्मिक पर्यटन और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना।





