यह अमावस्या पितरों की शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि 17 फरवरी को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, फिर भी ज्योतिषियों ने आज शाम से ही दान-पुण्य और पितृ तर्पण की सलाह दी है। ग्रहण के सूतक काल का भारत पर धार्मिक प्रभाव नहीं होगा, लेकिन पवित्र नदियों में स्नान का महत्व बढ़ गया है।
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