
उत्तर भारत में मौसम और प्रदूषण अलर्ट
उत्तराखंड में 30-31 दिसंबर को बर्फबारी और कोहरे का अनुमान, असम-मेघालय में भी अलर्ट। दिल्ली में भूजल स्तर गंभीर, नाइट्रेट-क्लोराइड सीमा से अधिक। ये पर्यावरणीय चुनौतियां स्वास्थ्य और रोजगार पर असर डाल रही हैं।

उत्तराखंड में 30-31 दिसंबर को बर्फबारी और कोहरे का अनुमान, असम-मेघालय में भी अलर्ट। दिल्ली में भूजल स्तर गंभीर, नाइट्रेट-क्लोराइड सीमा से अधिक। ये पर्यावरणीय चुनौतियां स्वास्थ्य और रोजगार पर असर डाल रही हैं।

दिल्ली-NCR में AQI सुधार पर GRAP-4 की पाबंदियां समाप्त हुईं, जिससे कक्षा 6-9 और 11 की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हो गई। इससे प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों की प्रभावशीलता साबित हुई

COP30 फोकस: ब्राजील के बेलेम में UNFCCC COP30 ने NbS को जलवायु शमन, अनुकूलन और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण बताया; ENACT साझेदारी ने 2.4 अरब हेक्टेयर क्षेत्र संरक्षण का लक्ष्य रखा। भारत के GIM, MISHTI जैसे मिशन इसमें सहायक

दिल्ली में ठंड, कोहरा और वायु प्रदूषण ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी, कई इलाकों में AQI 300 पार हो गया। आनंद विहार में AQI 326 दर्ज किया गया।

जम्मू‑कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल के ऊँचे इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण “चिल्लई‑कलां” की कड़ी ठंड का असर बढ़ा, जिससे पर्वतीय पारिस्थितिकी और परिवहन दोनों पर प्रभाव पड़ा। घने कोहरे और गिरते तापमान के कारण उत्तर प्रदेश व पड़ोसी राज्यों के कई ज़िलों में रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी कर मौसम से सावधानी बरतने की अपील की

2025 में 140 करोड़ से अधिक वृक्ष रोपे गए, NCAP के तहत 103 शहरों में PM10 स्तर घटा, और कार्बन सिंक में भारत टॉप 5 में। क्लाइमेट रेजिलिएंस और ग्रीन फाइनेंस पर जोर
पर्यावरण मंत्री ने घोषणा की कि GRAP-4 समाप्त होने के बाद भी ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम लागू रहेगा। दिल्ली में वाहनों से प्रदूषण रोकने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण। इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 22 दिसंबर को 9वां राष्ट्रीय लाइटिंग सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें जलवायु परिवर्तन, डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर चर्चा हुई। IMD और NDMA के सहयोग से चरम मौसम से निपटने के उपायों पर फोकस रहा

वनों की कटाई और कृषि उत्सर्जन को अलग करने का नया प्लान, राजनीतिक गतिरोध समाप्त।

प्रधानमंत्री की पहल के तहत ‘अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट’ को और गति दी गई है। आज कई क्षेत्रों में बरगद और अन्य स्थानीय पौधों के रोपण के साथ इस योजना के अगले चरण की शुरुआत की गई है, ताकि अरावली के बफर जोन को फिर से हरा-भरा बनाया जा सके
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