डोंगरगांव: Prakash Sharma
छत्तीसगढ़ के डोंगरगांव विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला घोरदा में पदस्थ सहायक शिक्षक विकास लाटा को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। शिक्षक पर फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने का गंभीर आरोप था, जो विभागीय जांच में सही पाया गया।
मामले की मुख्य बातें:
फर्जी प्रमाण पत्र का आरोप: सहायक शिक्षक विकास लाटा पर आरोप था कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए दिव्यांगता का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था।
जांच में सहयोग नहीं: विभागीय जांच के दौरान शिक्षक को अपना पक्ष रखने और वैध दस्तावेज पेश करने के कई अवसर दिए गए, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
मेडिकल टेस्ट से दूरी: प्रशासन ने उन्हें जिला चिकित्सालय दुर्ग में चिकित्सीय परीक्षण (Medical Examination) के लिए निर्देशित किया था, लेकिन वे वहां भी उपस्थित नहीं हुए।
तीन बार दिया गया मौका: नियमों के तहत उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए तीन बार मौका दिया गया, लेकिन हर बार वे अनुपस्थित रहे।
कड़ी कार्रवाई: आरोपों की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक करने का आदेश जारी कर दिया है।
प्रशासन का संदेश:
शिक्षा विभाग के इस सख्त कदम से उन लोगों में हड़कंप है जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी का लाभ उठा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।





