मार्च की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में ‘डोल जात्रा’ (होली) और श्री चैतन्य महाप्रभु की जयंती का उत्सव बड़े स्तर पर मनाया गया। इस्कॉन और गौड़ीय मठों सहित पूरे राज्य में कीर्तन, भजन और रंग-बिरंगे जुलूसों का आयोजन हुआ। यह त्योहार न केवल धार्मिक निष्ठा बल्कि सांस्कृतिक पहचान के उत्सव के रूप में भी मनाया गया।
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