मुंबई में आयोजित आरएसएस (RSS) के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में पद की कोई बाध्यता नहीं है और किसी भी जाति का व्यक्ति संघ प्रमुख बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर संघ उन्हें पद छोड़ने के लिए कहेगा, तो वह तुरंत इसे स्वीकार करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने वीर सावरकर को ‘भारत रत्न’ देने की वकालत करते हुए कहा कि इससे इस सम्मान की गरिमा और बढ़ेगी।
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