नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना जारी होते ही आज से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो 5 मार्च 2026 तक चलेगी। इसके बाद निर्धारित तिथि पर मतदान और मतगणना होगी।
किन राज्यों में कितनी सीटें?
इन 37 सीटों में सबसे अधिक सीटें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से हैं। इसके अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, ओडिशा, राजस्थान और झारखंड भी शामिल हैं।
इन राज्यों की विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या के आधार पर परिणाम काफी हद तक तय माने जा रहे हैं, लेकिन कुछ सीटों पर क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक गठबंधन की संभावना से मुकाबला रोचक हो सकता है।
दिग्गज नेताओं का कार्यकाल हो रहा समाप्त
इस चुनाव में कई बड़े और अनुभवी नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिनमें प्रमुख नाम हैं—
शरद पवार
अभिषेक मनु सिंघवी
प्रियंका चतुर्वेदी
इन नेताओं के दोबारा राज्यसभा पहुंचने या नए चेहरों को मौका मिलने को लेकर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टियों के भीतर मंथन का दौर जारी है।
एनडीए की बढ़त की संभावना
विधानसभाओं में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सीटों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में एनडीए मजबूत स्थिति में है।
वहीं विपक्षी दलों के लिए यह चुनाव एकजुटता की परीक्षा भी माना जा रहा है। यदि विपक्ष साझा रणनीति अपनाता है तो कुछ सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
चुनाव प्रक्रिया की रूपरेखा
नामांकन की अंतिम तिथि: 5 मार्च 2026
नामांकन पत्रों की जांच: 6 मार्च
नाम वापसी की अंतिम तिथि: 8 मार्च
मतदान (यदि आवश्यक हुआ): निर्धारित तिथि पर
परिणाम: मतदान के दिन ही घोषित किए जाएंगे
राज्यसभा चुनाव अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत होते हैं, जिसमें संबंधित राज्यों के विधायक वोट डालते हैं। मतदान ‘एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली’ (Single Transferable Vote) से किया जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
राज्यसभा में संख्या बल बढ़ने या घटने से केंद्र सरकार की नीतियों और विधेयकों को पारित कराने की रणनीति पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2026 के राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों के बीच उम्मीदवारों की घोषणा और रणनीति आने वाले दिनों में सियासी तापमान और बढ़ा सकती है।





