बिलासपुर। Vishnu tiwari
बिलासपुर प्रेस क्लब के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी और प्रशासनिक विवाद पर अब विराम लग गया है। राज्य शासन ने पूर्व सचिव दिलीप यादव द्वारा दायर की गई अपील को खारिज करते हुए 28 दिसंबर 2025 को संपन्न हुए चुनावों और नई कार्यकारिणी के गठन को वैध करार दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप सचिव द्वारा जारी इस आदेश के बाद अध्यक्ष अजीत मिश्रा और उनकी टीम की जीत पर अंतिम मुहर लग गई है।
अपील खारिज होने का मुख्य आधार:
शासन द्वारा पारित आदेश में स्पष्ट किया गया कि अपीलकर्ता दिलीप यादव ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। इसके विपरीत, उन्होंने स्वयं इस चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लिया था। कानून और सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी प्रक्रिया में स्वेच्छा से शामिल होने के बाद, परिणाम पक्ष में न आने पर उस प्रक्रिया की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता। इसी आधार पर शासन ने उनकी याचिका को आधारहीन मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि:
मामले के अनुसार, 19 सितंबर 2025 को तत्कालीन सचिव दिलीप यादव द्वारा कराए गए चुनावों को मतदाता सूची की विसंगतियों के कारण रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं ने अमान्य घोषित कर दिया था। इसके पश्चात, कलेक्टर द्वारा नामित निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन में 28 दिसंबर 2025 को पुनः चुनाव कराए गए। इस चुनाव में 2023 की वैध मतदाता सूची के आधार पर 447 सदस्यों ने मतदान किया था।
दिलीप यादव ने इस प्रक्रिया के खिलाफ हाईकोर्ट में भी याचिका लगाई थी, जिसके बाद मामला शासन के पास पहुंचा। सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि अपीलकर्ता स्वयं चुनाव में प्रत्याशी के रूप में शामिल हुए थे। शासन ने अब सहायक पंजीयक बिलासपुर को निर्देशित किया है कि अधिनियम की धारा 27 व 28 के तहत संस्था की आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा, दिलीप अग्रवाल और वीरेंद्र गहवाई की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन अग्रवाल और टैक्स कंसलटेंट सचिन कुमार सिंघल ने प्रभावी पैरवी की। इस आदेश के बाद प्रेस क्लब के निर्वाचित पदाधिकारियों और समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।





