राजनांदगांव। जिले के बहुचर्चित मोहड़ गोलीकांड और अवैध रेत उत्खनन मामले में लंबे समय से फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों ने आखिरकार कानून के आगे घुटने टेक दिए हैं। पुलिस की संपत्ति कुर्की और उद्घोषणा की कड़ी कार्यवाही से भयभीत होकर आरोपी संजय सिंह और अमन बैसन्दर ने माननीय न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला:
घटना 11 जून 2025 की है, जब मोहड़ नदी में अवैध रूप से रेत निकालने के लिए रैम्प निर्माण का विरोध करने पहुँचे ग्रामीणों पर कार सवार बदमाशों ने हमला कर दिया था। इस दौरान बदमाशों ने न केवल ग्रामीणों के साथ मारपीट की, बल्कि दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी की थी। थाना बसंतपुर में इस मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं, आर्म्स एक्ट और खनिज अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
पुलिस की चौतरफा घेराबंदी:
प्रकरण में पहले ही 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था, लेकिन दो मुख्य आरोपी लगातार फरार चल रहे थे। पुलिस अधीक्षक (SP) सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन में पुलिस ने इन फरार आरोपियों के खिलाफ ‘उद्घोषणा’ (Proclamation) की कार्यवाही शुरू की। आरोपियों के निवास स्थान ग्वालियर और भिंड (मध्य प्रदेश) में नोटिस चस्पा किए गए और स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराए गए।
संपत्ति कुर्की के डर से समर्पण:
पुलिस द्वारा संपत्ति कुर्क करने की तैयारी और कोर्ट द्वारा तय की गई 16 मार्च 2026 की समय-सीमा के दबाव में आकर आरोपी संजय सिंह (भिंड) और अमन बैसन्दर (ग्वालियर) ने 10 मार्च को न्यायालय में समर्पण कर दिया। न्यायालय के आदेश पर थाना बसंतपुर ने आवश्यक वैधानिक कार्यवाही पूर्ण की और दोनों आरोपियों का जेल वारंट प्राप्त होने पर उन्हें जिला जेल राजनांदगांव में दाखिल कर दिया गया।
राजनांदगांव पुलिस का संकल्प:
इस कार्यवाही ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी चाहे दूसरे राज्य में ही क्यों न छिपा हो, राजनांदगांव पुलिस की सक्रियता और कानूनी शिकंजे से बच पाना नामुमकिन है।





